विस्तृत उत्तर
असाध्य रोगों के निवारण के लिए साधक को भैरव के रौद्र या तामसिक स्वरूपों से विचलित हुए बिना, बटुक भैरव के समान उनके सौम्य, पालक स्वरूप पर ही ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
बटुक भैरव अभय देने वाले हैं, और असितांग भैरव का यह पालक स्वरूप आयु में वृद्धि और समस्त शारीरिक तथा मानसिक कष्टों (आधि-व्याधि) से मुक्ति प्रदान करने वाला है।





