विस्तृत उत्तर
सर्वप्रथम साधक शुद्ध जल, अक्षत और पुष्प दाहिने हाथ में लेकर, अपने गुरु का स्मरण करते हुए, अपना नाम, गोत्र, निवास स्थान और जिस असाध्य रोग से मुक्ति तथा जिस आयु वृद्धि की कामना है, उसका स्पष्ट उल्लेख करते हुए साधना को निर्विघ्न पूर्ण करने का दृढ़ संकल्प लेता है।





