विस्तृत उत्तर
रोग-निवारण के मामले में, यदि रोगी स्वयं चिकित्सालय में है या कोमा जैसी अचेतन अवस्था में है, तो कोई अन्य साधक उसके नाम और गोत्र का उच्चारण कर संकल्प ले सकता है और अपने तप का पुण्य उस रुग्ण व्यक्ति के खाते में स्थानांतरित कर सकता है।
यदि रोगी चिकित्सालय में या कोमा में हो तो कोई अन्य साधक उसके नाम और गोत्र का उच्चारण करके संकल्प ले सकता है और अपने तप का पुण्य उस रुग्ण व्यक्ति के खाते में स्थानांतरित कर सकता है।
रोग-निवारण के मामले में, यदि रोगी स्वयं चिकित्सालय में है या कोमा जैसी अचेतन अवस्था में है, तो कोई अन्य साधक उसके नाम और गोत्र का उच्चारण कर संकल्प ले सकता है और अपने तप का पुण्य उस रुग्ण व्यक्ति के खाते में स्थानांतरित कर सकता है।
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