विस्तृत उत्तर
अनुष्ठान के दौरान साधक का आहार पूर्णतः सात्विक होना चाहिए। गरिष्ठ भोजन, प्याज और लहसुन का प्रयोग सर्वथा वर्जित है। कुछ साधक अनुष्ठान की अवधि में केवल फलाहार या एक समय के सात्विक भोजन पर ही निर्भर रहते हैं।
शास्त्रों में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि महामृत्युंजय अनुष्ठान के दौरान और उसके प्रभाव को बनाए रखने के लिए भविष्य में भी मांस, मदिरा (Alcohol), और अन्य सभी प्रकार के व्यसनों का पूर्णतः त्याग करना चाहिए।
तामसिक प्रवृत्तियां और आहार मंत्र की सात्विक और उपचारात्मक ऊर्जा को तुरंत नष्T कर देते हैं।





