विस्तृत उत्तर
ऊर्जा के भूमिगत (Grounding) होने से बचने के लिए साधक को पृथ्वी पर केवल कुशा या ऊनी कंबल बिछाकर शयन करना चाहिए।
व्यर्थ के प्रलाप और असत्य भाषण से बचने के लिए अनुष्ठान कक्ष के बाहर भी न्यूनतम संवाद या मौन (Mauna) का पालन उचित माना गया है।





