विस्तृत उत्तर
भागवत सप्ताह में जमीन पर सोना नियमपूर्वक कथा सुनने वाले श्रोता के व्रत का भाग है। पाठ कहता है कि कथा का अधिकारी वैष्णव दीक्षा से युक्त होना चाहिए। जो व्यक्ति नियम से कथा सुनता है, उसे ब्रह्मचर्य से रहना, भूमि पर सोना और कथा समाप्त होने पर पत्तल में भोजन करना चाहिए। भूमि पर शयन का भाव विलास-त्याग, विनय और साधना है। सप्ताह के सात दिन श्रोता का जीवन कथा के लिये सरल और संयमित होना चाहिए। यह नियम आहार, वाणी और मन के अन्य नियमों से जुड़ा है: हल्का भोजन, निषिद्ध वस्तुओं का त्याग, निंदा से बचना, सत्य, शौच, दया, मौन, सरलता, विनय और उदारता का आचरण।
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