विस्तृत उत्तर
शास्त्रसम्मत पूर्ण अनुष्ठान 'पुरश्चरण' प्रक्रिया के माध्यम से ही फलीभूत होता है।
पुरश्चरण वैदिक गणित का एक ऐसा व्यवस्थित ढांचा है, जो मंत्र के जप से उत्पन्न अथाह मानसिक और ऊष्मीय ऊर्जा को भौतिक धरातल पर संतुलित (Grounding) करने का कार्य करता है।
पुरश्चरण के पाँच प्रमुख अंग होते हैं, जिनमें प्रत्येक अगला चरण पिछले चरण का दशांश (१०%) होता है।





