विस्तृत उत्तर
जो साधक मंत्र-सिद्धि के लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं, उनके लिए शास्त्रों में 'पुरश्चरण' की विधि बताई गई है।
यह एक विशेष अनुष्ठान है जिसमें एक निश्चित अवधि में मंत्र का निर्धारित संख्या में जप, हवन, तर्पण आदि किया जाता है।
यह एक गहन तपस्या है, जिसे सफलतापूर्वक संपन्न करने पर मंत्र सिद्ध हो जाता है।




