विस्तृत उत्तर
मंत्र की दिव्य ऊर्जा को धारण करने के लिए पात्र की शुद्धि आवश्यक है।
सात्विक आहार (शाकाहार), सत्य भाषण, इंद्रिय संयम और सदाचार का पालन करने से शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं, जिससे साधना का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
मंत्र की दिव्य ऊर्जा धारण करने के लिए पात्र की शुद्धि आवश्यक है — सात्विक आहार, सत्य भाषण, इंद्रिय संयम और सदाचार से शरीर-मन शुद्ध होकर साधना का प्रभाव कई गुना बढ़ता है।
मंत्र की दिव्य ऊर्जा को धारण करने के लिए पात्र की शुद्धि आवश्यक है।
सात्विक आहार (शाकाहार), सत्य भाषण, इंद्रिय संयम और सदाचार का पालन करने से शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं, जिससे साधना का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
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