विस्तृत उत्तर
साधना का मूल आधार है — अटूट श्रद्धा।
नमः शिवाय' का शाब्दिक अर्थ ही है 'मैं शिव को नमन करता हूँ'। यह 'मैं' और 'मेरे' के अहंकार का भगवान के चरणों में विसर्जन है।
जब साधक पूर्ण समर्पण भाव से जप करता है, तभी मंत्र की चेतना जाग्रत होती है।
श्रद्धा साधना का मूल आधार है — पूर्ण समर्पण भाव से जप करने पर ही मंत्र की चेतना जाग्रत होती है। नमः शिवाय = अहंकार का भगवान के चरणों में विसर्जन।
साधना का मूल आधार है — अटूट श्रद्धा।
नमः शिवाय' का शाब्दिक अर्थ ही है 'मैं शिव को नमन करता हूँ'। यह 'मैं' और 'मेरे' के अहंकार का भगवान के चरणों में विसर्जन है।
जब साधक पूर्ण समर्पण भाव से जप करता है, तभी मंत्र की चेतना जाग्रत होती है।
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