विस्तृत उत्तर
गणपति मंत्र जप की शास्त्रोक्त विधि गणेश पुराण और गणपति अथर्वशीर्ष में वर्णित है:
जप से पूर्व तैयारी
- 1स्नान: प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- 2वस्त्र: लाल वस्त्र सर्वश्रेष्ठ; या पीत/श्वेत वस्त्र
- 3आसन: लाल ऊनी या कुश का आसन — भूमि पर न बैठें
- 4दिशा: पूर्व या उत्तर मुख करके बैठें
- 5दीप: घी का दीप जलाएं
जप विधि (क्रमशः)
1गणेश स्मरण
> वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
> निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
2संकल्प
श्री गणेश प्रसाद प्राप्ति/विघ्न निवारण/कार्य सिद्धि के लिए मंत्र जप करता/करती हूँ।
3न्यास
- ▸हृदय पर हाथ रखकर 'ॐ गं गणपतये नमः'
- ▸मस्तक पर 'हृदयाय नमः'
- ▸नेत्रों पर 'नेत्राभ्यां नमः'
4ध्यान
बंद आँखों से गणेश जी का ध्यान करें — हाथी का मुख, एकदंत, मोदक हाथ में, लाल वस्त्र, बड़ा पेट, मूषक वाहन।
5माला जप
- ▸माला: रुद्राक्ष माला (सर्वश्रेष्ठ) या लाल चंदन की माला
- ▸पकड़ने की विधि: अनामिका (ring finger) और अंगूठे से
- ▸तर्जनी: माला को स्पर्श न करे
- ▸सुमेरु: मुख्य मनका न लांघें — माला पलटकर वापस आएं
- ▸मंत्र: 'ॐ गं गणपतये नमः' प्रत्येक मनके पर
6जप के दौरान
- ▸मन को गणेश जी पर केंद्रित रखें
- ▸बीच में बात न करें, उठें नहीं
- ▸यदि मन भटके तो धीरे से पुनः केंद्रित करें
7जप के बाद
- ▸माला सिर से लगाएं
- ▸'ॐ गं गणपतये नमः' — तीन बार बोलकर माला पूजन करें
- ▸प्रसाद ग्रहण करें (मोदक या लड्डू)
मंत्र जप के लिए उत्तम काल
- 1ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4-6 बजे) — सर्वश्रेष्ठ
- 2प्रातः 8-10 बजे — सामान्य पूजन के लिए
- 3बुधवार — विशेष फलदायी
- 4चतुर्थी तिथि — अत्यंत शुभ
गणपति अथर्वशीर्ष पाठ
जप से पूर्व या बाद में गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें — यह 12 ऋचाओं का अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है जो अथर्ववेद का परिशिष्ट माना जाता है।





