विस्तृत उत्तर
दुर्गा साधना की विधि देवी भागवत पुराण और तंत्र ग्रंथों में विस्तार से वर्णित है:
साधना के प्रकार
- 1सामान्य भक्ति साधना — नित्य पूजन, मंत्र जप, सप्तशती पाठ
- 2नवरात्रि साधना — 9 दिन का विशेष अनुष्ठान
- 3तांत्रिक साधना — गुरु मार्गदर्शन में
सामान्य दुर्गा साधना विधि
नित्य साधना
- 1ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें
- 2लाल आसन पर पूर्व या उत्तर मुख करके बैठें
- 3घी या तिल तेल का दीप जलाएं
- 4लाल फूल, लाल चंदन, कुमकुम अर्पित करें
- 5नवार्ण मंत्र: 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे' — 108 बार जप
- 6दुर्गा सप्तशती के किसी एक अध्याय का पाठ
- 7आरती
नवरात्रि विशेष साधना
- 1नवरात्रि के पहले दिन गुरु पूजन और संकल्प लें
- 29 दिन व्रत रखें
- 3प्रत्येक दिन नवदुर्गा के क्रमानुसार रूप की पूजा
- 4सप्तशती का एक या तीन पाठ नौ दिनों में पूरा करें
- 5अखंड दीप जलाएं
- 6कन्या पूजन (अष्टमी या नवमी)
साधना में क्या अर्पित करें
- ▸लाल गुड़हल, लाल गुलाब
- ▸सिंदूर (देवी को अत्यंत प्रिय)
- ▸चुनरी (लाल)
- ▸मीठा पान, बताशा, हलवा
साधना के नियम
- 1ब्रह्मचर्य का पालन करें
- 2क्रोध और झूठ से बचें
- 3मांस, मदिरा, प्याज-लहसुन वर्जित
- 4अपने मन में देवी का ध्यान बनाए रखें
- 5दूसरों की सेवा करें — देवी सर्वभूत में निवास करती हैं
मंत्र सिद्धि (विशेष साधना)
नवार्ण मंत्र का सवा लाख जप (1,25,000) नवरात्रि में करने से मंत्र सिद्धि होती है।





