विस्तृत उत्तर
दुर्गा साधना के विभिन्न स्तरों का वर्णन देवी भागवत पुराण और शाक्त परंपरा में मिलता है:
साधना के तीन स्तर
स्तर 1 — भक्ति साधना (सभी के लिए)
- ▸नित्य पूजा
- ▸दुर्गा सप्तशती पाठ
- ▸नवार्ण मंत्र जप
- ▸आरती
स्तर 2 — उपासना साधना (नियमित साधक)
- ▸दीक्षा प्राप्त साधक
- ▸पुरश्चरण और विशेष अनुष्ठान
स्तर 3 — तांत्रिक साधना (उच्च)
- ▸गुरु दीक्षा अनिवार्य
- ▸श्मशान साधना, रात्रि साधना आदि
नवरात्रि साधना — सर्वोत्तम
नवरात्रि दुर्गा साधना का सर्वश्रेष्ठ समय है — शरद नवरात्रि (अश्विन) और वसंत नवरात्रि (चैत्र) दोनों उत्तम।
नित्य साधना की विधि
प्रातःकाल
- 1स्नान, लाल वस्त्र
- 2देवी का आवाहन: 'ॐ दुर्गे दुर्गे रक्षिणि स्वाहा'
- 3षोडशोपचार पूजा
- 4नवार्ण मंत्र — 108 बार
- 5सप्तशती पाठ या एक अध्याय
- 6आरती
साधना के नियम
- 1ब्रह्मचर्य — साधना काल में
- 2मांसाहार और मद्यपान वर्जित
- 3लाल वस्त्र, लाल आसन
- 4एकांत स्थान
- 5मन की शुद्धि और श्रद्धा
नवरात्रि 9 दिन की साधना
- ▸प्रत्येक दिन संबंधित नवदुर्गा की पूजा
- ▸रात्रि जागरण
- ▸सप्तशती के 9 दिन में पाठ पूर्ण करें
- ▸नवमी को हवन और कन्या पूजन
देवी भागवत का वचन
शरद्काले महापूजा क्रियते या च वार्षिकी। तस्यां मम महात्म्यस्य श्रवणं भक्तिपूर्वकम्।' — शरद नवरात्रि में देवी के महात्म्य का भक्तिपूर्वक श्रवण और पूजन परम फलदायी है।





