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साधना विधि📜 महानिर्वाण तंत्र, शाक्त तंत्र — आसन विधान, कुलार्णव तंत्र2 मिनट पठन

काली साधना में कौन सा आसन उपयोग करें?

संक्षिप्त उत्तर

काली साधना में आसन: काला ऊनी कंबल (श्रेष्ठ), लाल ऊनी आसन, या कुश आसन। एक ही आसन नियमित उपयोग करें — यह 'सिद्ध' होता है। भक्ति साधना में पूर्व/उत्तर मुख; तांत्रिक साधना में दक्षिण मुख। पद्मासन या सुखासन, पीठ सीधी।

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विस्तृत उत्तर

काली साधना में आसन का वर्णन महानिर्वाण तंत्र और कुलार्णव तंत्र में मिलता है:

काली साधना के लिए उपयुक्त आसन

1काला कंबल — श्रेष्ठ

तांत्रिक परंपरा में काली साधना के लिए काला ऊनी कंबल (काली कंबली) सर्वोत्तम माना गया है। काला रंग काली का रंग है।

2लाल ऊनी आसन

शक्ति साधना में लाल ऊनी आसन भी उत्तम है।

3कृष्णमृग चर्म (काले हिरण की खाल)

तंत्र शास्त्र में इसका उल्लेख है — किंतु आज वन्यजीव संरक्षण कानून के अंतर्गत यह उपलब्ध और उचित नहीं। काले ऊनी आसन से काम चलाएं।

4कुश आसन

सामान्य साधना में कुश आसन सर्वत्र स्वीकार्य है।

आसन के नियम

  1. 1आसन स्वच्छ हो
  2. 2आसन भूमि पर सीधे न रखें — पाटे या चौकी पर
  3. 3एक ही आसन नियमित साधना में उपयोग करें — आसन 'सिद्ध' होता है
  4. 4साधना के बाद आसन को मोड़कर रखें — दूसरे न बैठें

बैठने की मुद्रा

  • सिद्धासन या पद्मासन — ध्यान के लिए
  • सुखासन — सामान्य जप के लिए
  • पीठ सीधी रहे

मुख दिशा

  • भक्ति साधना: पूर्व या उत्तर मुख
  • तांत्रिक साधना (अमावस्या): दक्षिण मुख — परंपरागत मत
  • दक्षिण काली की उपासना में दक्षिण मुख
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शास्त्रीय स्रोत
महानिर्वाण तंत्र, शाक्त तंत्र — आसन विधान, कुलार्णव तंत्र
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