विस्तृत उत्तर
प्रतिदिन, विशेषकर ब्रह्ममुहूर्त में, एक शांत और स्वच्छ स्थान पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें।
नमः शिवाय जप के लिए कौन सी दिशा में बैठना चाहिए को संदर्भ सहित समझें
नमः शिवाय जप के लिए कौन सी दिशा में बैठना चाहिए का सबसे सीधा सार यह है: नमः शिवाय जप के लिए पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठना चाहिए।
साधना विधि जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 3 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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काली साधना में कौन सा आसन उपयोग करें?
काली साधना में आसन: काला ऊनी कंबल (श्रेष्ठ), लाल ऊनी आसन, या कुश आसन। एक ही आसन नियमित उपयोग करें — यह 'सिद्ध' होता है। भक्ति साधना में पूर्व/उत्तर मुख; तांत्रिक साधना में दक्षिण मुख। पद्मासन या सुखासन, पीठ सीधी।
नमः शिवाय पुरश्चरण कैसे किया जाता है?
नमः शिवाय पुरश्चरण: माघ या भाद्रपद मास में 29 दिन तक 5 लाख जप, हवन और तर्पण — इस गहन तपस्या के सफल संपन्न होने पर मंत्र सिद्ध हो जाता है।
पुरश्चरण क्या होता है?
पुरश्चरण एक विशेष गहन अनुष्ठान है जिसमें निश्चित अवधि में मंत्र का निर्धारित संख्या में जप, हवन और तर्पण किया जाता है — सफलतापूर्वक संपन्न होने पर मंत्र सिद्ध हो जाता है।
नमः शिवाय साधना में आचार विचार की शुद्धि क्यों जरूरी है?
मंत्र की दिव्य ऊर्जा धारण करने के लिए पात्र की शुद्धि आवश्यक है — सात्विक आहार, सत्य भाषण, इंद्रिय संयम और सदाचार से शरीर-मन शुद्ध होकर साधना का प्रभाव कई गुना बढ़ता है।
नमः शिवाय का नित्य जप कितनी बार करना चाहिए?
नमः शिवाय का नित्य न्यूनतम 108 बार (एक माला) रुद्राक्ष माला से जप करना चाहिए — जप के समय मन को शिव के शांत, सौम्य और कल्याणकारी स्वरूप पर एकाग्र करें।
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