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मंत्र जप नियम📜 मंत्र शास्त्र, साधना पद्धति1 मिनट पठन

मंत्र जप में रेशमी आसन का प्रयोग कब करें?

संक्षिप्त उत्तर

देवी साधना (लक्ष्मी/दुर्गा/ललिता), विशेष अनुष्ठान, श्री विद्या। ऊर्जा कुचालक, सात्विक। लाल/गुलाबी। क्रम: कुश>मृगछाला>ऊनी>रेशमी>कपास। अहिंसा प्रश्न → विकल्प: ऊनी।

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विस्तृत उत्तर

रेशमी (Silk) आसन:

कब

  • देवी साधना: लक्ष्मी/दुर्गा/ललिता = रेशमी लाल/गुलाबी आसन।
  • विशेष अनुष्ठान: सवा लाख जप, नवरात्रि।
  • श्री विद्या: रेशम = त्रिपुर सुंदरी प्रिय।

गुण

  1. 1ऊर्जा कुचालक: ऊन जैसा = भूमि से insulate।
  2. 2सात्विक: रेशम = शुद्ध, सात्विक।
  3. 3सौंदर्य: देवी = सौंदर्य प्रिय — रेशम = श्रृंगार।

आसन क्रम (श्रेष्ठता): कुश > मृगछाला > ऊनी > रेशमी > कपास।

विशेष: कुछ परंपरा: रेशम = कीट (silkworm) से → अहिंसा प्रश्न। विकल्प: ऊनी/कपास।

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शास्त्रीय स्रोत
मंत्र शास्त्र, साधना पद्धति
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