विस्तृत उत्तर
ऊनी (ऊन/Wool) आसन = जप में विशेष:
महत्व
- 1ऊर्जा कुचालक: ऊन = विद्युत कुचालक → जप ऊर्जा भूमि में नहीं जाती → शरीर में संचित।
- 2शीतलता/ऊष्मा: ठंड में गर्म, गर्मी में शीतल = comfort → एकाग्रता।
- 3शास्त्रीय: गीता (6.11): 'शुचौ देशे प्रतिष्ठाप्य स्थिरमासनमात्मनः। नात्युच्छ्रितं नातिनीचं चैलाजिनकुशोत्तरम्।' — कुश → मृगछाला → वस्त्र (ऊनी)।
- 4कुश आसन: कुश घास = सर्वोत्तम (शास्त्र)। उपलब्ध न हो → ऊनी → कपास → रेशम।
क्रम (श्रेष्ठता): कुश > मृगछाला > ऊनी > रेशमी > कपास। भूमि पर सीधे न बैठें।





