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मंत्र जप नियम📜 मंत्र शास्त्र, योग शास्त्र1 मिनट पठन

मंत्र जप में ऊनी आसन का क्या महत्व है?

संक्षिप्त उत्तर

ऊन = विद्युत कुचालक → ऊर्जा भूमि में नहीं जाती। गीता: 'चैलाजिनकुशोत्तरम्' — कुश+मृगछाला+वस्त्र। क्रम: कुश > मृगछाला > ऊनी > रेशम > कपास। भूमि पर सीधे नहीं।

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विस्तृत उत्तर

ऊनी (ऊन/Wool) आसन = जप में विशेष:

महत्व

  1. 1ऊर्जा कुचालक: ऊन = विद्युत कुचालक → जप ऊर्जा भूमि में नहीं जाती → शरीर में संचित।
  2. 2शीतलता/ऊष्मा: ठंड में गर्म, गर्मी में शीतल = comfort → एकाग्रता।
  3. 3शास्त्रीय: गीता (6.11): 'शुचौ देशे प्रतिष्ठाप्य स्थिरमासनमात्मनः। नात्युच्छ्रितं नातिनीचं चैलाजिनकुशोत्तरम्।' — कुश → मृगछाला → वस्त्र (ऊनी)।
  4. 4कुश आसन: कुश घास = सर्वोत्तम (शास्त्र)। उपलब्ध न हो → ऊनी → कपास → रेशम।

क्रम (श्रेष्ठता): कुश > मृगछाला > ऊनी > रेशमी > कपास। भूमि पर सीधे न बैठें।

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शास्त्रीय स्रोत
मंत्र शास्त्र, योग शास्त्र
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