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उपांशु जप में ओठ हिलने चाहिए या नहीं?

संक्षिप्त उत्तर

हां — ओठ+जिह्वा हिलें, ध्वनि मंद (whisper) = स्वयं मुश्किल से सुनें, दूसरे नहीं। यही उपांशु। वाचिक=आवाज, उपांशु=ओठ हिलें बिना आवाज, मानस=ओठ भी नहीं।

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विस्तृत उत्तर

उपांशु जप = ओठ हिलें, किन्तु आवाज न निकले:

परिभाषा

  • वाचिक: ओठ + आवाज = दूसरे सुनें।
  • उपांशु: ओठ + जिह्वा हिले = किन्तु ध्वनि इतनी मंद कि स्वयं भी मुश्किल से सुनें, दूसरे बिल्कुल नहीं।
  • मानस: ओठ भी न हिलें = केवल मन।

सार: उपांशु = ओठ हां हिलें — यही उपांशु की पहचान। ध्वनि = फुसफुसाहट (whisper)। दूसरा व्यक्ति बगल में बैठा हो = न सुने।

शक्ति: मानस (1000x) > उपांशु (100x) > वाचिक (1x)। उपांशु = अनुष्ठान में सर्वप्रचलित।

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शास्त्रीय स्रोत
मंत्र शास्त्र
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