विस्तृत उत्तर
उपांशु जप = ओठ हिलें, किन्तु आवाज न निकले:
परिभाषा
- ▸वाचिक: ओठ + आवाज = दूसरे सुनें।
- ▸उपांशु: ओठ + जिह्वा हिले = किन्तु ध्वनि इतनी मंद कि स्वयं भी मुश्किल से सुनें, दूसरे बिल्कुल नहीं।
- ▸मानस: ओठ भी न हिलें = केवल मन।
सार: उपांशु = ओठ हां हिलें — यही उपांशु की पहचान। ध्वनि = फुसफुसाहट (whisper)। दूसरा व्यक्ति बगल में बैठा हो = न सुने।
शक्ति: मानस (1000x) > उपांशु (100x) > वाचिक (1x)। उपांशु = अनुष्ठान में सर्वप्रचलित।





