विस्तृत उत्तर
अखंड = निरंतर — किन्तु विश्राम विधि है:
व्यक्तिगत अखंड
- ▸12/24 घंटे = कठिन बिना विश्राम।
- ▸शौचालय/जल = अनुमति — जप मन में जारी।
- ▸'अखंड' = मंत्र ध्वनि कभी रुके नहीं — शरीर विश्राम = मानस जप जारी।
सामूहिक अखंड (प्रचलित)
- ▸भक्तों की पारी (relay) — एक रुके = दूसरा शुरू।
- ▸24 घंटे/7 दिन = अनेक भक्त मिलकर।
- ▸उदाहरण: अखंड रामायण, अखंड कीर्तन।
सार: व्यक्तिगत = मानस जप जारी (शरीर विश्राम)। सामूहिक = relay। 'अखंड = ध्वनि निरंतर, व्यक्ति नहीं।'





