लोकभागवत पुराण (११.१७.३१) में ब्रह्मचारी और महर्लोक का क्या संबंध है?
भागवत ११.१७.३१ में कृष्ण कहते हैं — आजीवन अखंड ब्रह्मचर्य + गहन वेदाध्ययन + निःस्वार्थ गुरु-समर्पण = मृत्यु के बाद सीधे महर्लोक। तीनों का संयोग आवश्यक है।
#भागवत 11.17.31#ब्रह्मचारी#महर्लोक