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कर्ण के विजय धनुष की क्या विशेषता थी?

विजय धनुष अखंड और अभेद्य था। इससे चलाने वाले के चारों ओर सुरक्षा-घेरा बनता था जो पाशुपतास्त्र भी नहीं भेद सकता।

संक्षिप्त उत्तर

विजय धनुष अखंड और अभेद्य था। इससे चलाने वाले के चारों ओर सुरक्षा-घेरा बनता था जो पाशुपतास्त्र भी नहीं भेद सकता। इस धनुष को हाथ से छोड़ने पर ही कर्ण का वध संभव हुआ।

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विस्तृत उत्तर

विजय धनुष कर्ण का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अस्त्र था जिसकी विशेषताएं अद्वितीय थीं।

यह धनुष विश्वकर्मा ने भगवान शिव के लिए त्रिपुरासुर के विनाश के लिए बनाया था। शिव ने त्रिपुर-संहार के बाद इसे इंद्र को दिया, इंद्र ने परशुराम को, और परशुराम ने श्राप के बाद दया में कर्ण को दिया।

मुख्य विशेषताएं — किसी भी अस्त्र या शस्त्र से यह खंडित नहीं हो सकता था। इससे बाण छूटते ही अत्यंत भयावह ध्वनि उत्पन्न होती थी। यह धनुष जिसके हाथ में होता था उसके चारों ओर एक अभेद्य सुरक्षा-घेरा बन जाता था — यहाँ तक कि पाशुपतास्त्र भी उस घेरे को भेद नहीं सकता था। यह श्रीकृष्ण को भी ज्ञात था — जब कर्ण के हाथ में विजय धनुष था तब उन्होंने अर्जुन से सावधान रहने को कहा।

युद्ध में महत्व — एक प्रसंग में जब कर्ण ने अर्जुन के रथ पर बाण चलाया तो रथ कई गज पीछे खिसक गया — और उस रथ पर स्वयं श्रीकृष्ण और हनुमान भी थे! यह विजय धनुष की शक्ति थी। अंत में जब कर्ण का रथ-चक्र धँसा और वे नीचे उतरे, उस समय उनके हाथ में विजय नहीं था — तभी अर्जुन ने वध किया।

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