का सरल उत्तर
विजय धनुष अखंड और अभेद्य था। इससे चलाने वाले के चारों ओर सुरक्षा-घेरा बनता था जो पाशुपतास्त्र भी नहीं भेद सकता। इस धनुष को हाथ से छोड़ने पर ही कर्ण का वध संभव हुआ।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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