विस्तृत उत्तर
कर्ण ने घटोत्कच का वध 'वासवी शक्ति' (अमोघशक्ति) अस्त्र से किया था — यह वही अस्त्र था जो देवराज इंद्र ने कर्ण को कवच-कुंडल के बदले में दिया था।
पृष्ठभूमि — इंद्र ने ब्राह्मण वेश में कर्ण से कवच-कुंडल लिए और बदले में यह अमोघ शक्ति-अस्त्र दिया था। इसकी विशेषता थी कि इसे एक बार छोड़ने पर यह अपने लक्ष्य को अवश्य नष्ट करके ही इंद्र के पास वापस लौटता था। कर्ण ने इसे अर्जुन के लिए बचाकर रखा था।
14वें दिन का प्रसंग — कुरुक्षेत्र के 14वें दिन जब रात्रि युद्ध हो रहा था, घटोत्कच ने कौरव सेना का भयंकर संहार कर दिया। उसकी राक्षसी शक्ति रात में और बढ़ रही थी। दुर्योधन के बार-बार आग्रह और कौरव सेना की दयनीय दशा देखकर कर्ण को विवश होकर यह अस्त्र चलाना पड़ा।
महाभारत का वर्णन — द्रोणपर्व के अनुसार वह प्रज्वलित शक्ति घटोत्कच की माया को भस्म करके उसके वक्षःस्थल को गहराई तक चीरकर रात्रि के प्रकाश में ऊपर को चली गई और नक्षत्रों में विलीन हो गई।
कृष्ण की प्रसन्नता — यही कारण था कि कृष्ण प्रसन्न हुए। अब कर्ण के पास अर्जुन को मारने का वह अमोघ अस्त्र नहीं रहा।





