विस्तृत उत्तर
धनुर्वेद और अग्नि पुराण में अस्त्रों का विस्तृत वर्गीकरण किया गया है।
मूल विभाजन — दो प्रकार: (1) दिव्यास्त्र — मंत्रों से संचालित, देवताओं द्वारा प्रदत्त। (2) यांत्रिकास्त्र — यंत्र और शारीरिक बल से चलाए जाने वाले।
वैदिक वर्गीकरण (4 मुख्य प्रकार) — अमुक्ता: हाथ में पकड़कर प्रयोग, फेंके नहीं जाते — तलवार, गदा, कुल्हाड़ी। मुक्ता: फेंककर चलाए जाते हैं — बाण, चक्र, शक्ति। मुक्तामुक्त: दोनों प्रकार से — भाला। यंत्रमुक्त: यंत्र से फेंके जाते हैं।
आधुनिक विद्वानों के वर्गीकरण अनुसार और भी उपभेद मिलते हैं — मुक्तसंनिवृत्ती: वे अस्त्र जो फेंककर पुनः वापस बुलाए जा सकें।
दिव्यास्त्रों के प्रकार — देव-संबंधित: ब्रह्मास्त्र (ब्रह्मा), पाशुपतास्त्र (शिव), नारायणास्त्र (विष्णु), वज्रास्त्र (इंद्र), आग्नेयास्त्र (अग्नि), वरुणास्त्र (वरुण), वायव्यास्त्र (वायु) आदि।
कुल मिलाकर पुराणों में 100 से अधिक प्रकार के अस्त्रों का उल्लेख मिलता है।





