विस्तृत उत्तर
काली मंत्र जप की संख्या साधना के उद्देश्य और स्तर पर निर्भर करती है:
नित्य साधना
- ▸न्यूनतम: 108 बार (1 माला) — प्रतिदिन
- ▸मध्यम: 1008 बार (11 माला) — अमावस्या और विशेष दिनों में
- ▸उत्तम: 10,008 बार (108 माला) — दीपावली या काली पूजा पर
पुरश्चरण (मंत्र सिद्धि के लिए)
- ▸लघु पुरश्चरण: 1,25,000 (सवा लाख) जप
- ▸मध्यम पुरश्चरण: 3,00,000 (तीन लाख) जप
- ▸पूर्ण पुरश्चरण: 10,00,000 (दस लाख) जप — 'क्रीं' बीज के लिए
विशेष साधना की जप संख्या
- ▸अमावस्या साधना: 1008 बार (एक रात में)
- ▸नवरात्रि: प्रतिदिन 1008 बार × 9 = 9072 जप
- ▸दीपावली काली पूजा: 10,008 बार (पूरी रात)
माला और जप विधि
- ▸माला: रुद्राक्ष माला (सर्वश्रेष्ठ) या काले हकीक (black agate) की माला
- ▸उंगली: अनामिका और अंगूठे से माला पकड़ें
- ▸तर्जनी: माला से स्पर्श न करे
- ▸सुमेरु (मुख्य मनका): न लांघें — माला पलटकर वापस आएं
विशेष नियम
- 1जप की संख्या प्रतिदिन न घटाएं — यदि 108 से शुरू किया है तो प्रतिदिन 108 करें
- 2मासिक धर्म के दौरान स्त्रियां जप कर सकती हैं (मानसिक जप)
- 3सूतक में जप न करें या मानसिक जप करें
दशांश हवन
पुरश्चरण पूर्ण होने पर कुल जप का 1/10 हवन करें — काले तिल, लाल गुड़हल, घी से।




