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साधना विधि📜 शिव पुराण - उमा संहिता, तंत्र शास्त्र2 मिनट पठन

महामृत्युंजय मंत्र जप की विधि क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

कुश आसन पर पूर्व/उत्तर दिशा में बैठकर, रुद्राक्ष माला से, शिव का ध्यान करते हुए महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। तर्जनी से माला न स्पर्श करें। जप के बाद दशांश हवन करें।

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विस्तृत उत्तर

महामृत्युंजय मंत्र जप की शास्त्रोक्त विधि:

पूर्व तैयारी

  1. 1स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें (श्वेत वस्त्र शुभ)
  2. 2पूजा स्थान पर शिव प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें
  3. 3घी का दीप जलाएं
  4. 4रुद्राक्ष माला तैयार रखें (108 दाने)

विधि

  1. 1आसन: कुश, ऊन या शुद्ध वस्त्र के आसन पर बैठें। पूर्व या उत्तर दिशा में मुख करें।
  1. 1संकल्प: 'अमुक रोग/संकट निवारण/स्वास्थ्य लाभ के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप करता/करती हूँ।'
  1. 1न्यास: हृदय, मस्तक, शिखा, कंधों और नेत्रों पर भस्म या चंदन लगाएं।
  1. 1जप: रुद्राक्ष माला से जप करें — माला को अनामिका (ring finger) और अंगूठे से पकड़ें। तर्जनी का स्पर्श माला से न हो।
  1. 1उच्चारण: मन में (मानसिक जप) या धीमे स्वर में — अत्यंत स्पष्ट उच्चारण हो।
  1. 1ध्यान: जप के समय ध्यान करें — शिव के त्रिनेत्र स्वरूप का, श्वेत वर्ण, जटा में चंद्र और गंगा, गले में रुद्राक्ष।

जप के बाद

  • जप का दशांश हवन (घृत, तिल, बेलपत्र से)
  • शिव आरती
  • प्रणाम और प्रसाद ग्रहण

रोगी के लिए विशेष: रोगी व्यक्ति के बिस्तर के पास बैठकर या उसकी ओर मुख करके जप करें और जप के बाद जल अभिमंत्रित करके पिलाएं।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण - उमा संहिता, तंत्र शास्त्र
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