विस्तृत उत्तर
महामृत्युंजय मंत्र जप की शास्त्रोक्त विधि:
पूर्व तैयारी
- 1स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें (श्वेत वस्त्र शुभ)
- 2पूजा स्थान पर शिव प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें
- 3घी का दीप जलाएं
- 4रुद्राक्ष माला तैयार रखें (108 दाने)
विधि
- 1आसन: कुश, ऊन या शुद्ध वस्त्र के आसन पर बैठें। पूर्व या उत्तर दिशा में मुख करें।
- 1संकल्प: 'अमुक रोग/संकट निवारण/स्वास्थ्य लाभ के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप करता/करती हूँ।'
- 1न्यास: हृदय, मस्तक, शिखा, कंधों और नेत्रों पर भस्म या चंदन लगाएं।
- 1जप: रुद्राक्ष माला से जप करें — माला को अनामिका (ring finger) और अंगूठे से पकड़ें। तर्जनी का स्पर्श माला से न हो।
- 1उच्चारण: मन में (मानसिक जप) या धीमे स्वर में — अत्यंत स्पष्ट उच्चारण हो।
- 1ध्यान: जप के समय ध्यान करें — शिव के त्रिनेत्र स्वरूप का, श्वेत वर्ण, जटा में चंद्र और गंगा, गले में रुद्राक्ष।
जप के बाद
- ▸जप का दशांश हवन (घृत, तिल, बेलपत्र से)
- ▸शिव आरती
- ▸प्रणाम और प्रसाद ग्रहण
रोगी के लिए विशेष: रोगी व्यक्ति के बिस्तर के पास बैठकर या उसकी ओर मुख करके जप करें और जप के बाद जल अभिमंत्रित करके पिलाएं।





