विस्तृत उत्तर
सनातन धर्म के कर्मकांड में स्पष्ट उल्लेख है कि बिना शुद्ध आसन के किया गया कोई भी धार्मिक अनुष्ठान या मंत्र जप पूरी तरह से निष्फल (व्यर्थ) हो जाता है।
वैज्ञानिक कारण — जब साधक मंत्र का उच्चारण करता है, तो उसके भीतर एक विशेष आध्यात्मिक और विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती है। यदि वह सीधे नंगी जमीन पर बैठता है, तो पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति 'अर्थिंग' (Earthing) का काम करती है और सारी अर्जित ऊर्जा को सोख लेती है।
शास्त्रों की चेतावनी — पारंपरिक ग्रंथों में चेतावनी दी गई है कि बिना आसन के जप करने से दुःख और दरिद्रता आती है। पत्थर, मिट्टी, या नंगी जमीन पर बैठकर जप करना सर्वथा शास्त्र विरुद्ध है।
सही आसन — ऊर्जा के संरक्षण के लिए कुचालक (Insulator) आसन का होना अनिवार्य है। कुशा के आसन को पाप नाशक और रेशमी या ऊनी आसन को सिद्धि प्रदायक माना गया है।





