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जप नियम📜 मंत्र महोदधि — जप नियम, धर्म सिंधु, कुलार्णव तंत्र2 मिनट पठन

मंत्र जप करते समय कौन सा नियम मानना चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

जप नियम: स्नान, स्वच्छ वस्त्र, पूर्व-उत्तर मुख, सात्विक भोजन। वर्जित: बात करना, सोना, तर्जनी से माला, सुमेरु लाँघना। जप के बाद कुछ क्षण मौन। कुलार्णव: जप और मंत्र गोपनीय रखें — शक्ति बचती है।

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विस्तृत उत्तर

जप के नियम मंत्र महोदधि और धर्म सिंधु में विस्तार से वर्णित हैं:

आवश्यक नियम

1शुद्धता

  • स्नान के बाद जप
  • स्वच्छ वस्त्र
  • जप स्थान स्वच्छ

2समय की नियमितता

  • प्रतिदिन एक ही समय — धर्म सिंधु
  • एक बार शुरू किए जप को बीच में न छोड़ें

3दिशा

  • पूर्व या उत्तर मुख

4आहार

  • सात्विक भोजन — प्याज-लहसुन रहित
  • जप से पहले भारी भोजन न करें
  • नित्य नियमित जप में एकभुक्त (एक बार भोजन) श्रेष्ठ

5वर्जित

  • जप के दौरान बात न करें
  • जप के दौरान सोएं नहीं
  • जप के दौरान खाएं-पिएं नहीं
  • माला को तर्जनी से न छुएं
  • सुमेरु न लांघें

6मौन

मंत्र महोदधि — जप के बाद कुछ क्षण मौन में बैठें। जप की ऊर्जा भीतर स्थिर हो।

7गोपनीयता

कुलार्णव तंत्र — अपने जप और मंत्र को दूसरों को न बताएं। जप की शक्ति गोपनीय रहने पर अधिक होती है।

न्यूनतम नियम

स्नान + स्वच्छ स्थान + एकाग्र मन — इतने से भी जप पूर्ण।

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शास्त्रीय स्रोत
मंत्र महोदधि — जप नियम, धर्म सिंधु, कुलार्णव तंत्र
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