विस्तृत उत्तर
जप के नियम मंत्र महोदधि और धर्म सिंधु में विस्तार से वर्णित हैं:
आवश्यक नियम
1शुद्धता
- ▸स्नान के बाद जप
- ▸स्वच्छ वस्त्र
- ▸जप स्थान स्वच्छ
2समय की नियमितता
- ▸प्रतिदिन एक ही समय — धर्म सिंधु
- ▸एक बार शुरू किए जप को बीच में न छोड़ें
3दिशा
- ▸पूर्व या उत्तर मुख
4आहार
- ▸सात्विक भोजन — प्याज-लहसुन रहित
- ▸जप से पहले भारी भोजन न करें
- ▸नित्य नियमित जप में एकभुक्त (एक बार भोजन) श्रेष्ठ
5वर्जित
- ▸जप के दौरान बात न करें
- ▸जप के दौरान सोएं नहीं
- ▸जप के दौरान खाएं-पिएं नहीं
- ▸माला को तर्जनी से न छुएं
- ▸सुमेरु न लांघें
6मौन
मंत्र महोदधि — जप के बाद कुछ क्षण मौन में बैठें। जप की ऊर्जा भीतर स्थिर हो।
7गोपनीयता
कुलार्णव तंत्र — अपने जप और मंत्र को दूसरों को न बताएं। जप की शक्ति गोपनीय रहने पर अधिक होती है।
न्यूनतम नियम
स्नान + स्वच्छ स्थान + एकाग्र मन — इतने से भी जप पूर्ण।





