विस्तृत उत्तर
चलते-फिरते या कार्य करते हुए किए जाने वाले जप को 'मानसिक जप' या 'अजपा जप' कहा जाता है। इसके लिए माला या जोर से बोलने की आवश्यकता नहीं होती। इसका मुख्य नियम यह है कि जप पूरी तरह से मन के भीतर होना चाहिए और बाहरी गतिविधियों का प्रभाव मन की एकाग्रता पर नहीं पड़ना चाहिए। चलते-फिरते जप करते समय व्यक्ति को अपवित्र स्थानों का ध्यान रखने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि मन हमेशा पवित्र माना गया है। हालांकि, वैदिक और तांत्रिक मंत्रों के लिए एक निश्चित आसन पर बैठना ही अनिवार्य है, ताकि शरीर की ऊर्जा स्थिर रहे।





