विस्तृत उत्तर
ध्यान में बिना सचेत प्रयास के मंत्र का स्वतः उच्चारण = 'अजपा जप' — ध्यान गहनता का अत्यन्त शुभ संकेत।
आध्यात्मिक अर्थ
1. अजपा जप: जब मंत्र इतना गहरा उतर जाए कि बिना प्रयास स्वतः चलने लगे = मंत्र चैतन्य। साधना परिपक्वता।
2. मंत्र सिद्धि संकेत: तंत्र शास्त्र: मंत्र 'जीवित' हो गया = सिद्धि निकट। देवता शक्ति प्रवाहित।
3. संस्कार जागरण: बार-बार जपने से मंत्र अवचेतन में 'संस्कार' बनता है। ध्यान में चेतन मन शान्त → अवचेतन सक्रिय = मंत्र स्वतः।
4. नाद अनुभव: आन्तरिक ध्वनि (अनाहत नाद) — ब्रह्माण्डीय ध्वनि से तालमेल।
क्या करें: रोकें नहीं, साक्षी भाव से सुनें, गोपनीय रखें, साधना जारी, गुरु को बताएँ।





