विस्तृत उत्तर
शिव त्रिनेत्र दर्शन = अत्यंत शुभ + दुर्लभ:
- 1शिव कृपा: शिव = तीसरा नेत्र खोलते = अज्ञान दहन + ज्ञान प्रकाश। दिखना = शिव कृपा।
- 2आज्ञा चक्र: शिव त्रिनेत्र = आज्ञा चक्र प्रतीक → आपका आज्ञा = सक्रिय।
- 3ज्ञान: तीसरा नेत्र = ज्ञान नेत्र → 'आत्मज्ञान निकट।'
- 4वैराग्य: शिव = काम दहन (कामदेव) → तीसरा नेत्र = वासना नाश → वैराग्य।
- 5संहार + सृजन: पुराना (अज्ञान) = नष्ट → नया (ज्ञान) = सृजन।
क्या करें: 'ॐ नमः शिवाय' तीव्र। शिवलिंग अभिषेक। रुद्राभिषेक। महामृत्युंजय। गुरु = share।
दुर्लभ: यह दर्शन = अत्यंत दुर्लभ। यदि वास्तविक = जीवन परिवर्तनकारी।





