ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
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ध्यान अनुभव📜 शैव परंपरा, पूर्व शोध1 मिनट पठन

ध्यान में शिव का तीसरा नेत्र दिखने का क्या मतलब है?

संक्षिप्त उत्तर

शिव कृपा (अज्ञान दहन+ज्ञान), आज्ञा सक्रिय, आत्मज्ञान निकट, वैराग्य (काम दहन)। अत्यंत दुर्लभ+शुभ! 'ॐ नमः शिवाय', अभिषेक, गुरु share। वास्तविक=जीवन परिवर्तन।

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विस्तृत उत्तर

शिव त्रिनेत्र दर्शन = अत्यंत शुभ + दुर्लभ:

  1. 1शिव कृपा: शिव = तीसरा नेत्र खोलते = अज्ञान दहन + ज्ञान प्रकाश। दिखना = शिव कृपा।
  2. 2आज्ञा चक्र: शिव त्रिनेत्र = आज्ञा चक्र प्रतीक → आपका आज्ञा = सक्रिय।
  3. 3ज्ञान: तीसरा नेत्र = ज्ञान नेत्र → 'आत्मज्ञान निकट।'
  4. 4वैराग्य: शिव = काम दहन (कामदेव) → तीसरा नेत्र = वासना नाश → वैराग्य।
  5. 5संहार + सृजन: पुराना (अज्ञान) = नष्ट → नया (ज्ञान) = सृजन।

क्या करें: 'ॐ नमः शिवाय' तीव्र। शिवलिंग अभिषेक। रुद्राभिषेक। महामृत्युंजय। गुरु = share।

दुर्लभ: यह दर्शन = अत्यंत दुर्लभ। यदि वास्तविक = जीवन परिवर्तनकारी।

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शास्त्रीय स्रोत
शैव परंपरा, पूर्व शोध
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