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ध्यान अनुभव📜 माण्डूक्य उपनिषद, अद्वैत1 मिनट पठन

ध्यान में तुरीय अवस्था क्या होती है?

संक्षिप्त उत्तर

चौथी अवस्था: जाग्रत/स्वप्न/सुषुप्ति से परे = शुद्ध चेतना। माण्डूक्य: 'न भीतर न बाहर = आत्मा = ब्रह्म।' ॐ = अ+उ+म+शून्य — शून्य = तुरीय। ध्यान: शरीर भूला+विचार बंद+जागरूक।

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विस्तृत उत्तर

तुरीय = चौथी अवस्था — 'ॐ' का चौथा मात्रा:

3 + 1 अवस्थाएं

  1. 1जाग्रत (अ): बाहरी दुनिया = चेतन।
  2. 2स्वप्न (उ): भीतरी दुनिया = अवचेतन।
  3. 3सुषुप्ति (म): गहरी नींद = अचेतन (शून्य किन्तु अजागरूक)।
  4. 4तुरीय (शून्य/अमात्रा): तीनों से परे = शुद्ध चेतना = जागरूक + शून्य।

माण्डूक्य उपनिषद: 'नान्तःप्रज्ञं न बहिःप्रज्ञं...' — न भीतर न बाहर, न ज्ञान न अज्ञान = तुरीय = आत्मा = ब्रह्म।

ॐ: अ + उ + म + शून्य (silence) = 4 मात्रा। शून्य = तुरीय।

ध्यान में: शरीर भूला (जाग्रत ↓) + विचार बंद (स्वप्न ↓) + जागरूक (सुषुप्ति ≠) = तुरीय!

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शास्त्रीय स्रोत
माण्डूक्य उपनिषद, अद्वैत
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