विस्तृत उत्तर
तुरीय = चौथी अवस्था — 'ॐ' का चौथा मात्रा:
3 + 1 अवस्थाएं
- 1जाग्रत (अ): बाहरी दुनिया = चेतन।
- 2स्वप्न (उ): भीतरी दुनिया = अवचेतन।
- 3सुषुप्ति (म): गहरी नींद = अचेतन (शून्य किन्तु अजागरूक)।
- 4तुरीय (शून्य/अमात्रा): तीनों से परे = शुद्ध चेतना = जागरूक + शून्य।
माण्डूक्य उपनिषद: 'नान्तःप्रज्ञं न बहिःप्रज्ञं...' — न भीतर न बाहर, न ज्ञान न अज्ञान = तुरीय = आत्मा = ब्रह्म।
ॐ: अ + उ + म + शून्य (silence) = 4 मात्रा। शून्य = तुरीय।




