'क्लीं' मंत्र'क्लीं' मंत्र में 'ई' ध्वनि का क्या अर्थ है?'क्लीं' में 'ई' ध्वनि 'पूर्ति' या 'संतुष्टि' का प्रतीक है — यह इच्छा के फलित होने की अवस्था को दर्शाता है।#ई ध्वनि#पूर्ति संतुष्टि#इच्छा फलित
जीवन एवं मृत्युप्रेत अवस्था कब उत्पन्न होती है?प्रेत अवस्था मृत्यु के तुरंत बाद उत्पन्न होती है। सामान्य मृत्यु में 13 दिन तक, अकाल मृत्यु में शेष आयु तक और बिना संस्कार के कल्पान्त तक रहती है। पिंडदान से यह समाप्त होती है।#प्रेत#अवस्था#मृत्यु
जीवन एवं मृत्युनरक में जीव को किस अवस्था में दंड दिया जाता है?नरक में दंड जागृत, बंधन में जकड़ी, भूख-प्यास से व्याकुल अवस्था में दिया जाता है। बेहोश होने पर पुनः होश में लाया जाता है। यातना-देह में पूरी संवेदनशीलता बनी रहती है।#नरक#अवस्था#यातना देह
ध्यान अनुभवयोग निद्रा में गहरी अवस्था में जाने पर क्या अनुभव होता है?शरीर 'गायब', विचार शून्य (जागरूक!), समय विलुप्त, प्रकाश/रंग, भावनात्मक healing, संकल्प शक्ति↑। Bihar School: '1 घंटा=4 घंटे नींद।' 'सोना नहीं — जागकर सोना!'#योग निद्रा#गहरी#अवस्था
मंत्र जप दर्शनमंत्र जप से समाधि अवस्था कैसे प्राप्त होती है?योग सूत्र: 'तज्जपस्तदर्थभावनम्'। जप(धारणा)→ध्यान(एक धारा)→समाधि(मंत्र+मन+देवता=एक)। सविकल्प→निर्विकल्प। चैतन्य/मीरा = नाम→भाव समाधि। वर्षों अभ्यास। गुरु = त्वरित।#समाधि#जप#अवस्था
ध्यान अनुभवध्यान में शून्य अवस्था का क्या अर्थ है?विचार/इंद्रिय/अहंकार शून्य = शुद्ध चेतना। पतंजलि: 'चित्तवृत्तिनिरोध'। तुरीय (4वीं अवस्था)। शून्य = पूर्ण (ब्रह्म)। समाधि द्वार। नींद नहीं — जागरूक+शून्य = सच्चा।#शून्य#अवस्था#अर्थ
ध्यान अनुभवध्यान में तुरीय अवस्था क्या होती है?चौथी अवस्था: जाग्रत/स्वप्न/सुषुप्ति से परे = शुद्ध चेतना। माण्डूक्य: 'न भीतर न बाहर = आत्मा = ब्रह्म।' ॐ = अ+उ+म+शून्य — शून्य = तुरीय। ध्यान: शरीर भूला+विचार बंद+जागरूक।#तुरीय#अवस्था#क्या