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ध्यान अनुभव📜 योग शास्त्र, पतंजलि1 मिनट पठन

ध्यान में शून्य अवस्था का क्या अर्थ है?

संक्षिप्त उत्तर

विचार/इंद्रिय/अहंकार शून्य = शुद्ध चेतना। पतंजलि: 'चित्तवृत्तिनिरोध'। तुरीय (4वीं अवस्था)। शून्य = पूर्ण (ब्रह्म)। समाधि द्वार। नींद नहीं — जागरूक+शून्य = सच्चा।

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विस्तृत उत्तर

शून्य = ध्यान सर्वोच्च — समाधि द्वार:

क्या है: विचार शून्य। इंद्रियां शून्य। अहंकार शून्य। 'मैं' नहीं — केवल 'है'। न प्रकाश, न अंधकार — शुद्ध चेतना

पतंजलि: 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः' (1.2) — चित्त वृत्ति (विचार) निरोध = योग = शून्य अवस्था।

अर्थ

  1. 1निर्विचार: विचार बंद = शून्य = ध्यान सफल।
  2. 2तुरीय: जाग्रत/स्वप्न/सुषुप्ति से परे = चौथी अवस्था = शून्य।
  3. 3ब्रह्म: शून्य = शून्य नहीं — पूर्ण = ब्रह्म = 'पूर्णमदः पूर्णमिदम्'।
  4. 4समाधि: शून्य = सविकल्प/निर्विकल्प समाधि का द्वार।

सावधानी: शून्य = नींद नहीं! जागरूक + शून्य = सच्चा ध्यान। नींद = तमस।

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शास्त्रीय स्रोत
योग शास्त्र, पतंजलि
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