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समाधि प्रश्नोत्तरी — 40 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित समाधि विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 40 प्रश्न

कुंडलिनी

तंत्र में सहस्रार चक्र तक पहुंचने पर क्या स्थिति होती है?

शिव-शक्ति मिलन = समाधि। निर्विकल्प (द्वैत समाप्त)। अमृत प्रवाह, सहस्र सूर्य प्रकाश, सर्वज्ञता, मोक्ष। अत्यंत दुर्लभ। रामकृष्ण/रमण = उदाहरण।

सहस्रारचक्रस्थिति
वास्तु तस्वीर नियम

घर में ताजमहल की तस्वीर लगाना शुभ है या अशुभ?

ताजमहल की तस्वीर घर में अशुभ है — यह मूलतः एक मकबरा (समाधि) है जो मृत्यु और शोक का प्रतीक है। इसकी जगह मंदिर, तीर्थ, झरने या सौम्य देवता की तस्वीरें लगाएँ।

ताजमहलसमाधिवास्तु दोष
लोक

शाक द्वीप में वायु देव की उपासना कैसे होती है?

शाक द्वीप में ऋतव्रत आदि चार वर्ण प्राणायाम और अष्टांग योग द्वारा समाधिस्थ होकर भगवान के वायु स्वरूप (प्राणतत्व) की आराधना करते हैं।

शाक द्वीपवायु देवयोग
ध्यान साधना

ध्यान और समाधि में क्या भेद है?

ध्यान: 'मैं ध्यान कर रहा' (ध्याता-ध्येय अलग, प्रयास, सीमित)। समाधि: 'मैं' विलय (त्रिपुटी एक, प्रयास-रहित, कालातीत)। योगसूत्र: ध्यान=निरंतर प्रवाह, समाधि=केवल ध्येय शेष। उपमा: ध्यान=तेल धारा, समाधि=नदी-सागर विलय। ध्यान=अभ्यास, समाधि=फल (स्वतः)।

ध्यानसमाधिसम्प्रज्ञात
वामदेव फल

वामदेव शिव की भक्ति से पाप कैसे दूर होते हैं?

परमेश्वरपरायण होकर समाधि से वामदेव का ध्यान करने वाले भक्त विमल आत्मा और ब्रह्मनिष्ठ होकर पाप से छूटते हैं।

वामदेव भक्तिपाप मुक्तिसमाधि
ब्रह्मा और सद्योजात

ब्रह्मा ने शिव को कुमार रूप में कैसे देखा?

ब्रह्मा समाधिस्थ होकर परमेश्वर का ध्यान कर रहे थे, तभी उन्होंने शिखाधारी श्वेतलोहित कुमार को देखा।

ब्रह्माकुमार रूपसद्योजात
सद्योजात महिमा

सद्योजात रूप में शिव कैसे प्रकट हुए?

जब ब्रह्मा समाधि में परमेश्वर का ध्यान कर रहे थे, तब शिखाधारी श्वेतलोहित कुमार प्रकट हुआ, जिसे सद्योजात माना गया।

सद्योजातशिव प्रकटश्वेतलोहित कुमार
योगी की शक्तियाँ

योगी देवताओं, ग्रहों और भुवनों को कैसे देखता है?

योगी देवताओं के बिम्ब, विमानों, ग्रहों, नक्षत्रों, तारों, भुवनों और पातालस्थ पदार्थों को समाधि से देख सकता है।

योगीदेव दर्शनग्रह
शैव पद और वैराग्य

सिद्धियाँ समाधि में विघ्न क्यों बनती हैं?

चौंसठ गुण व्यवहार में सिद्धि कहे जाते हैं, पर समाधि में वही उपसर्ग यानी विघ्न बन जाते हैं।

सिद्धिसमाधिउपसर्ग
योग बाधाएँ

भ्रान्तिदर्शन क्या होता है?

समाधि के समीप पहुँचकर अज्ञान के कारण अनात्म पदार्थों में आत्मज्ञान रूप विपरीत ज्ञान रखना भ्रान्तिदर्शन है।

भ्रान्तिदर्शनविपरीत ज्ञानअनात्म
योग बाधाएँ

चित्त का लक्ष्य में न ठहरना क्या कहलाता है?

समाधि अवस्था पाकर भी भवबन्धन के कारण चित्त का लक्ष्य में न ठहरना अनवस्थितचित्तत्व कहलाता है।

अनवस्थित चित्तचित्तसमाधि
कुम्भक और ऐक्य

धारणा, ध्यान और समाधि की गणना कैसे बताई गई है?

बारह प्राणायामों की एक धारणा, बारह धारणाओं का एक ध्यान और बारह ध्यानों की एक समाधि कही गई है।

धारणाध्यानसमाधि
योग अभ्यास

योगी को पाप, विषय और काम-क्रोध कैसे दूर करने चाहिए?

योगी को प्राणायाम से दोष, धारणा से पाप, प्रत्याहार से विषय, ध्यान से अनीश्वर गुण और समाधि से बुद्धि की वृद्धि करनी चाहिए।

योगीपाप दहनप्रत्याहार
प्रत्याहार और ध्यान

ध्यान और समाधि में क्या अंतर है?

ध्येय विषय में चित्त की एकाग्रता ध्यान है; ध्येयमात्र से प्रकाशित देहशून्य स्थिति समाधि है।

ध्यानसमाधिचित्त एकाग्रता
अष्टांग योग

अष्टांग योग क्या होता है?

अष्टांग योग के आठ अंग यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि हैं।

अष्टांग योगयमनियम
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह तप से बड़ा क्यों है?

कहा गया है कि जो फल तप, योग और समाधि से भी नहीं मिलता, वह भागवत सप्ताह से सहज मिल जाता है।

भागवत सप्ताहतपयोग
लोक

महाविष्णु की योगनिद्रा कैसी है?

यह परम समाधि है जिसमें सृष्टि सूक्ष्म रूप में रहती है।

महाविष्णुयोगनिद्रासमाधि
लोक

तपोलोक में रहने वाले जीव ध्यान और समाधि का आहार कैसे करते हैं?

तपोलोक के जीव ध्यान, समाधि और ईश्वर के सामीप्य को ही अपना जीवन-स्रोत मानते हैं।

तपोलोकध्यानसमाधि
लोक

तपोलोक में रहने वाले योगी किन गुणों वाले होते हैं?

तपोलोक के योगी शुद्ध चित्त, ऊर्ध्वरेता, जितेंद्रिय, निष्काम, शांत और समाधिस्थ होते हैं।

तपोलोक योगीजितेंद्रियवैराग्य
लोक

क्या तपोलोक में दिन और रात होते हैं?

नहीं, तपोलोक में दिन-रात का काल-चक्र नहीं होता।

तपोलोकदिन रातकाल चक्र
लोक

तपोलोक में रहने वाले तपस्वी कैसे होते हैं?

तपोलोक के तपस्वी शुद्ध चित्त, ऊर्ध्वरेता, जितेंद्रिय, विकाररहित और समाधिस्थ होते हैं।

तपस्वीतपोलोकजितेंद्रिय
चक्र शोधन और कुंडलिनी जागरण

सहस्रार चक्र का बीज मंत्र क्या है?

सहस्रार चक्र का बीज मंत्र 'ॐ' या मौन है — यह मस्तिष्क के शिखर पर स्थित, परमतत्त्व से संबद्ध है। साधना से समाधि, ब्रह्म-ज्ञान और आत्म-साक्षात्कार की प्राप्ति होती है।

सहस्रार चक्रॐ या मौनसमाधि
बीज मंत्र परिचय

ऋषि 'मंत्र-द्रष्टा' क्यों कहलाते हैं?

ऋषि 'मंत्र-द्रष्टा' इसलिए कहलाते हैं क्योंकि उन्होंने मंत्रों की रचना नहीं की बल्कि अपनी योग-शक्ति से ब्रह्मांडीय नाद-सागर में दैवीय शक्तियों की ध्वनि-तरंगों को 'देखा' और अनुभव किया।

मंत्र द्रष्टामंत्र कर्ता नहींयोग शक्ति
असाध्य रोग निवारण और विशेष प्रयोग

111 श्वासों की विधि क्या है?

विज्ञान भैरव तंत्र की तकनीक: 111 श्वासों तक सजग रहकर श्वास की गति पर ध्यान केंद्रित करें — इससे चेतना स्थिर होती है और समाधि के निकट पहुँचा जाता है।

111 श्वासविज्ञान भैरव तंत्रआंतरिक यज्ञ

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।