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विस्तृत उत्तर
तपोलोक में रहने वाले तपस्वी शुद्ध चित्त वाले, ऊर्ध्वरेता, सिद्ध और जितेंद्रिय होते हैं। ये वे महान मुनि, सिद्ध और योगी हैं जिन्होंने घोर तपस्या के द्वारा अपनी समस्त इंद्रियों को जीत लिया है और अपने अखंड तप से भगवान नारायण को प्रसन्न किया है। ऐसे सिद्ध आत्माएँ तपोलोक में आकर अपनी सभी लौकिक और अलौकिक इच्छाओं तथा महत्वाकांक्षाओं से मुक्त होकर अनंत काल तक शांत, विकाररहित और समाधिस्थ अवस्था में रहते हैं।
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