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विस्तृत उत्तर
तपोलोक में दिन-रात का काल-चक्र नहीं है। वहाँ ऋतुओं का परिवर्तन भी नहीं होता। वहाँ का वातावरण पूर्ण शांति, नीरवता और एकाग्रता से परिपूर्ण है। वहाँ निवास करने वाले जीव केवल ध्यान और समाधि का आहार करते हैं। उनके लिए ईश्वर का सामीप्य ही उनका एकमात्र जीवन-स्रोत है।
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