विस्तृत उत्तर
विज्ञान भैरव तंत्र में शिव द्वारा वर्णित ध्यान तकनीक के अनुसार, साधक को अपनी श्वासों की गति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
यदि साधक सजग रहकर लगभग 111 श्वासों तक इस प्रक्रिया को दोहराता है, तो उसकी चेतना स्थिर होती है, और वह समाधि के निकट पहुँच सकता है।
योग और तंत्र में इसे आंतरिक यज्ञ (यज) माना गया है।





