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विस्तृत उत्तर
सद्योजात रूप में शिव श्वेतलोहित कुमार के रूप में प्रकट हुए। पाठ में कहा गया है कि उनतीसवें श्वेतलोहित कल्प में ब्रह्माजी समाधिस्थ होकर परमेश्वर का ध्यान कर रहे थे। उसी समय शिखाधारी और श्वेतलोहित वर्ण वाला एक कुमार प्रकट हुआ। ब्रह्मा ने उस कुमार को देखकर ध्यानयोग में तत्पर होकर उसे साक्षात् परमेश्वर जाना और परात्पर ब्रह्म के रूप में स्वीकार किया।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 11, PDF पृष्ठ 63, श्लोक 2-5
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