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विस्तृत उत्तर
ब्रह्मा ने शिव को कुमार रूप में तब देखा जब वे समाधिस्थ होकर परमेश्वर का ध्यान कर रहे थे। उसी समय शिखाधारी, श्वेतलोहित वर्ण वाला कुमार प्रकट हुआ। ब्रह्मा ने उस सद्योजात कुमार को देखकर ब्रह्मरूपी महात्मा परमेश्वर को हृदय में धारण किया और ध्यानयोग में तत्पर हो गए। फिर ध्यानयोग से उन्होंने उसे साक्षात् परमेश्वर जानकर प्रणाम किया।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 11, PDF पृष्ठ 63, श्लोक 2-5
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