विस्तृत उत्तर
विष्णु ने ब्रह्मा को बताया कि जो महाशक्ति आ रही है, वे आदि-अन्तरहित पार्वतीनाथ प्रभु शिव हैं। उनके पैरों के आघात से समुद्र का जल आकाश में उठ रहा है और उनकी नासिका की वायु से विष्णु की नाभि से उत्पन्न महापद्म हिल रहा है। विष्णु ने कहा कि अब दोनों को वृषध्वज लोकप्रभु महादेव की स्तोत्र से प्रार्थना करनी चाहिए। जब ब्रह्मा ने शंकर के विषय में कठोर वचन कहा, तब विष्णु ने उन्हें रोककर कहा कि महात्मा शिव की निन्दा न करें; वे साक्षात् धर्मस्वरूप, प्रचण्ड, महायोग प्रदीपक और वरदाता हैं।
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