विस्तृत उत्तर
सनकादि कुमार ज्ञानमार्ग में जीवन की अनित्यता और दुख को जानकर गए। कहा गया है कि जीवन में सुख कम और दुख अधिक है, जीवन जरा और शोक से युक्त है, जन्म और मरण बार-बार होते हैं, स्वर्ग में सुख अल्प है और नरक में दुख ही दुख है। भावी अटल है और ये बातें अवश्यंभावी हैं। यह जानकर, और ऋभु तथा सनत्कुमार को ब्रह्मा के वश में स्थित देखकर, त्रिगुणातीत सनक, सनातन और सनन्दन अध्यात्मसम्बन्धी ब्रह्मज्ञान की ओर प्रवृत्त हो गए।
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