विस्तृत उत्तर
उपनिषदों का परिचय और महत्व स्वयं उपनिषद ग्रंथों, शंकराचार्य के भाष्यों और मुण्डकोपनिषद में मिलता है:
उपनिषद का अर्थ
उप' (निकट) + 'नि' (नीचे) + 'षद' (बैठना) = गुरु के निकट बैठकर प्राप्त ज्ञान। उपनिषद वह रहस्य ज्ञान है जो गुरु शिष्य को एकांत में देता है।
उपनिषदों की संख्या
108 उपनिषद प्रमाणित हैं। शंकराचार्य ने 10 'दशोपनिषद' को प्रमुख माना:
दस प्रमुख उपनिषद
| उपनिषद | वेद | प्रमुख ज्ञान |
|---------|-----|---------------|
| ईशोपनिषद | शुक्ल यजुर्वेद | ब्रह्म सर्वत्र है |
| केनोपनिषद | सामवेद | ब्रह्म किससे जाना जाता है? |
| कठोपनिषद | कृष्ण यजुर्वेद | यम-नचिकेता संवाद; आत्मज्ञान |
| प्रश्नोपनिषद | अथर्ववेद | छः प्रश्न — जीवन रहस्य |
| मुण्डकोपनिषद | अथर्ववेद | अपरा-परा विद्या |
| माण्डूक्योपनिषद | अथर्ववेद | ॐ की व्याख्या; 4 चेतना अवस्थाएं |
| तैत्तिरीयोपनिषद | कृष्ण यजुर्वेद | पाँच कोश |
| ऐतरेयोपनिषद | ऋग्वेद | प्रज्ञान ब्रह्म |
| छांदोग्योपनिषद | सामवेद | तत्त्वमसि; महावाक्य |
| बृहदारण्यक | शुक्ल यजुर्वेद | सर्वविस्तृत; 'अहं ब्रह्मास्मि' |
चार महावाक्य (उपनिषदों का सार)
- 1'प्रज्ञानं ब्रह्म' (ऐतरेय — ऋग्वेद) — चेतना ही ब्रह्म है
- 2'अहं ब्रह्मास्मि' (बृहदारण्यक — यजुर्वेद) — मैं ब्रह्म हूँ
- 3'तत्त्वमसि' (छांदोग्य — सामवेद) — वह तुम हो
- 4'अयमात्मा ब्रह्म' (माण्डूक्य — अथर्ववेद) — यह आत्मा ब्रह्म है
उपनिषदों के प्रमुख दार्शनिक सिद्धांत
- 1ब्रह्म — परम सत्ता जो सर्वव्यापी और चेतन है
- 2आत्मा — व्यक्तिगत चेतना
- 3अद्वैत — ब्रह्म और आत्मा एक ही हैं (शंकराचार्य)
- 4माया — सांसारिक प्रतीति जो ब्रह्म को ढकती है
- 5मोक्ष — आत्मा का ब्रह्म में विलय
उपनिषद और पश्चिम
जर्मन दार्शनिक शोपेनहावर ने कहा — 'उपनिषद मेरे जीवन का सबसे बड़ा उपहार हैं। मृत्यु के समय भी यही मेरा सांत्वना देंगे।'
कठोपनिषद — यम-नचिकेता संवाद
बालक नचिकेता ने मृत्यु के देवता यम से आत्मज्ञान माँगा। यम ने धन, राज्य और सुंदरता से मना करने की कोशिश की — किंतु नचिकेता ने केवल आत्मज्ञान माँगा।
> 'न जायते म्रियते वा कदाचित्...' — आत्मा न जन्मती है, न मरती है।





