विस्तृत उत्तर
दक्षिणामूर्ति साधना के दौरान जिन वेदान्त महावाक्यों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, वे प्रमुख रूप से दो हैं:
- 1तत् त्वम् असि (वह तू ही है)
- 2अहं ब्रह्मास्मि (मैं ब्रह्म हूँ)
इन महावाक्यों का अर्थ यह है कि जीव और ब्रह्म में कोई भेद नहीं है, और साधक स्वयं वही परब्रह्म चैतन्य स्वरूप है।

