विस्तृत उत्तर
दक्षिणामूर्ति की पहचान उनकी अद्वितीय शिक्षण पद्धति 'मौन व्याख्यान' से होती है। इसमें गुरु वटवृक्ष के मूल में विराजमान होते हैं और बिना कोई शब्द कहे, केवल अपने मौन से ही शिष्यों (सनकादि मुनि) के सभी संशयों (छिन्नसंशयाः) का निवारण कर देते हैं। यह मौन उपदेश परब्रह्म तत्त्व का प्रत्यक्ष और तात्कालिक प्रकटीकरण है, जो वाणी और बुद्धि की सीमाओं से परे होता है।




