विस्तृत उत्तर
भगवान के ध्यान स्वरूप का स्पष्ट चित्रण करने वाला सर्वाधिक प्रतिष्ठित श्लोक इस प्रकार है:
वटविटपिसमीपे भूमिभागे निषण्णं सकलमुनिजनानां ज्ञानदातारमारात्। त्रिभुवनगुरुमीशं दक्षिणामूर्तिदेवं जननमरणदुःखच्छेददक्षं नमामि।
यह श्लोक भगवान दक्षिणामूर्ति को वटवृक्ष के नीचे विराजमान, मुनियों को ज्ञान देने वाला और जन्म-मरण के दुःख को दूर करने वाला बताता है।





