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विस्तृत उत्तर
तारपणम् एक उच्च और गहन तांत्रिक अनुष्ठान है जिसका वर्णन दक्षिणामूर्ति संहिता के 38वें अध्याय में मिलता है। इसमें मूल मंत्र के साथ 'तर्पयामि नमः' जोड़कर जल या विशिष्ट द्रव्यों का 108 बार अर्पण किया जाता है। यह तीव्र उपासना केवल योग्य सद्गुरु के मार्गदर्शन में ही करनी चाहिए।
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