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विस्तृत उत्तर
पूजा के अंत में विधि या मंत्रों में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगने का मंत्र इस प्रकार है:
मंत्र हीनं, क्रिया हीनं, भक्ति हीनं, श्रद्धा हीनं, द्रव्य हीनं परमेश्वर, यत् पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तुते।
इसका अर्थ है कि हे परमेश्वर, मैं मंत्र, क्रिया, भक्ति, श्रद्धा और द्रव्य से हीन हूँ, फिर भी मेरे द्वारा की गई यह पूजा आपकी कृपा से परिपूर्ण हो जाए।
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