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विस्तृत उत्तर
भगवान दक्षिणामूर्ति शिव का वह परम स्वरूप हैं, जो परम ज्ञान (ब्रह्म-विद्या) के आदि गुरु और विश्व-शिक्षक के रूप में प्रतिष्ठित हैं। वे केवल उपदेश देने वाले नहीं हैं, बल्कि साक्षात् परम तत्त्व का सगुण रूप हैं। दक्षिणामूर्ति उपनिषद्, जो एक शैव उपनिषद् है, इस स्वरूप का विशेष गुणगान करता है और पुष्टि करता है कि शिव के इस आचार्य रूप का ज्ञान ही साधक के लिए परम मुक्ति और आनंद का मार्ग प्रशस्त करता है।
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