विस्तृत उत्तर
## उपनिषद में मोक्ष कैसे प्राप्त करें?
उपनिषदों में मोक्ष के दो स्तर
- ▸जीवनमुक्ति — जीते जी, शरीर रहते मोक्ष का अनुभव
- ▸विदेहमुक्ति — मृत्यु के पश्चात् ब्रह्म में विलय
मुण्डकोपनिषद (3/2/9) — ब्रह्मज्ञान ही मोक्ष
*'एषोऽणुरात्मा चेतसा वेदितव्यो यस्मिन् प्राणः पञ्चधा संविवेश।
प्राणैश्चित्तं सर्वमोतं प्रजानां यस्मिन् विशुद्धे विभवत्येष आत्मा।।'*
— यह सूक्ष्म आत्मा चेतना से जाननी है — जब यह शुद्ध होती है, तब आत्मा का पूर्ण प्रकाश होता है — यही मोक्ष है।
कठोपनिषद (6/14-15) — मृत्यु-पाश से मुक्ति
*'सर्वे वेदा यत्पदमामनन्ति तपांसि सर्वाणि च यद्वदन्ति।'*
— जो पद सभी वेद घोषित करते हैं, सभी तपस्या जिसे बताती है — वह है 'ओम्'। जो इसे जानता है — वह मृत्यु-पाश से मुक्त हो जाता है।
बृहदारण्यक (4/4/6-7) — मोक्ष की स्थिति
*'ब्रह्म वेद ब्रह्मैव भवति।'*
— जो ब्रह्म को जानता है, वह ब्रह्म ही हो जाता है। उसके पाप नष्ट हो जाते हैं, वह निर्भय होता है।
मोक्ष-प्राप्ति का व्यावहारिक मार्ग
- 1वैराग्य — संसार की अनित्यता को समझो
- 2विवेक — आत्मा और अनात्मा का विचार करो
- 3गुरु-सेवा — श्रोत्रिय गुरु की शरण लो
- 4श्रवण-मनन-निदिध्यासन
- 5नेति नेति — देह-मन की पहचान छोड़ो
- 6'अहं ब्रह्मास्मि' का साक्षात्कार
तैत्तिरीय (2/9) — मोक्ष का आनंद
*'आनन्दो ब्रह्म।'*
— ब्रह्म ही आनंद है। मोक्ष कोई निर्जीव अवस्था नहीं — वह परम आनंद की स्थिति है।





